Powered By Blogger

My Blog List

Thursday, October 25, 2012

चुल्लू भर पानी

उसकी उम्र महज तीन साल की थी ड्रम के पीछे खड़ा दिख भी नहीं रहा था ,पर ड्रम पर उसकी कलाइया बड़ी निपुणता के साथ जादू बिखेर रही थी ! उम्र -7 साल नन्ही  सी बच्ची जिसे दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पाती ,बिजली की फुर्ती से नाच रही थी !....अद्बुत अद्भुत- इंडिया गोट टैलेंट - के मंच पर जब भी ऐसी प्रतिभाओ से रूबरू होता हू एक हूक सी उठती है जब महसूस होता है 40 साल बाद भी मैं कलाविहीन ही हूँ !इन नन्हे फ़नकारो की जादूगरी देख कर एक ओर जहा फक्र होता है वही  चुल्लू भर पानी में डूब मरने की इच्छा भी जन्म लेती है !पर हमारे देश में चुल्लू भर पानी इतना सहज मयस्सर नहीं है !सोचिये अगर सहज मयस्सर होती तो क्या अबतक भ्रष्ट  और पतित नेताओं की जमात डूब नहीं चुकी होती !दुनिया संवेदनहीन लोगो से मुक्त नहीं हो गयी होती !

बचपन से ही मेरी इच्छा बाँसुरी बजाने में रही कई बार बाँसुरी  खरीदी ,फूँक मार मार के फेफड़े फुला लिए पर बाँसुरी कमबख्त बजी नहीं !इस प्रतिभा का मैं निर्धन ही साबित हुआ !बाँसुरी तो बाँसुरी है सीखने  के लिए कठोर साधना करनी पड़ती है ,यह कोई सत्ता नहीं जो हाथ आते ही व्यक्ति को फरेब के सारे सरगम सिखा देती है मानो इस प्रतिभा का वह जन्मजात धनि रहा हो !सत्ता पाते  ही व्यक्ति गबन की दुनिया में पैर पसारने लगता है और जल्द ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लेता है!क्या पक्ष क्या विपक्ष दोनों ओर असीमित प्रतिभा के दर्शन होते है !मैं ही मुर्ख रहा जो बाँसुरी बजाने  की सोची सत्ता बजाता तो अब तक मेरी  प्रतिभा निखर कर देश भर में मीडिया का भरन पोषण कर रही होती !

पर यहाँ तो अपना भरण पोषण ही अत्यन्त कठिन हो चला है कठिन क्यों न हो आखिर  हम 100 करोड़ लोग दिन रात मेहनत कर कुछ मुठ्ठी भर मंत्रियो और नौकरशाहों की अय्याशियों के  लिए धन उपलब्ध कराने  में जो लगे हुए है! मेहनत  मशक्कत करने से हमारे  खून का रंग पीला  और उनके खून का रंग नीला होता जा रहा है! हिन्दुस्तान के ये हुनरबाज बड़े ही सौभाग्यशाली है जो इनका सामना चुल्लू भर पानी से नहीं होता !मुझे तो कभी कभी ऐसा प्रतीत होता है मानो चुल्लू भर पानी के देश से विलुप्त होने के पीछे इनका ही हाथ हो !

समस्या के जड़ में चुल्लू भर पानी ही है राष्ट्रहित में हमें इसे खोजना ही होगा,..........  मगर कहाँ?? 

Monday, October 15, 2012

दिल पे रख ले यार

वैज्ञानिक  सर जान गार्डन जिन्हें चिकित्सा के क्षेत्र  में अतुलनीय योगदान के लिए इस साल नोबल सम्मान दिया जा रहा है,जब वे स्कूल में थे तो उनके विज्ञानं के शिक्षक ने उनके कार्य को घटिया कहा  था और परीक्षा में सबसे कम अंक दिए थे और कहा था ---"यह समय की बर्बादी है और हास्यास्पद भी "!

आज जब चारो तरफ  उनकी चर्चा है ,बहुत ही सहेज कर रखे गए अपने उस रिपोर्ट कार्ड को उन्होंने मीडिया  को दिखाया ! सोचता हूँ रिपोर्ट कार्ड से भी ज्यादा उन्होंने  अपने शिक्षक की टिप्पड़ी को  सहेज कर रखा !

Monday, April 9, 2012

घर घर पहुंची पोर्नोग्राफी

एक अलसाई सी सुबह थी,
आँख  पूरी तरह  से  खुली भी नहीं थी! 
दरवाजे पर कुछ सरसराहट का स्वर आया, 
देखा ,अख़बार वाले ने अखबार सरकाया था! 
जैसे ही अखबार उठाने चला,
जोर का झटका लगा ,
नहीं  नहीं कोई दुर्घटना नहीं घटी थी
बात दरअसल यह है कि
अखबार के ऊपर पत्रिका इंडिया टुडे पड़ी थी 
और उसके कवर पेज  पर,
एक लड़की अधूरे वस्त्रों में खड़ी थी ,
ये तो बाद में पता चला उसकी तो  यूनीफॉर्म ही वही थी
मुहँसे निकला इट्स नॉट फेयर
अबे इंडिया टुडे है की डेबोनेयर!!

 पत्रिका पर लिखा था ----
दबे पाँव आपके घर घुसा पोर्न
मैंने कहा -ठीक ही है गुरु  क्या गजब ढाये हो ,
दबे पाँव ही तो आये हो
कवर पर सुश्री सनी लियोनि छाई  थी
कमबख्त दबे पाँव ही तो घुस पाई थी

मेरे लिए तो समस्या थी बड़ी  ,क्या बताएं ,
इस पत्रिका को घर में कहाँ रखे कहाँ छिपायें
घर में सत्तर वर्षीया पिता जी और  दो छोटे छोटे  चंगु मंगू
कबख्त पत्रिका देखते ही कहेंगे -हे राम नंगू नंगू
जब कोई जगह इन चंगु मंगू से महफूज नहीं दिखी
पत्रिका हमने गाडी में धर दी

पर , कहते हैं होइए वही जे राम रची रखा-
सारी योजना रह  गयी धरी की धरी
मेरी अनुपस्थ्ती में ,
श्रीमती जी गाडी ले कर चल दी
मैं निर्दोष  परिस्थिति से अनजान बैठा था
फटाक की आवाज हुई,श्रीमती जी ने पत्रिका मुझ पर फेका था
बोली- साहित्य मे रूचि रखते हो
और  गाडी में ऐसी पत्रिका पढ़ते हो
मुझसे तो बात ही  मत करना
अपनी सफाई बच्चो के आगे ही देना !

क्या कहूँ -बड़ी मनहूस घड़ी  थी,
फेकी हुई पत्रिका टेबल पर ही पड़ी  थी!
दुर्गति कुछ और होनी थी बाकी ,
पिता जी आये पत्रिका हाथो में उठा ली! ,
"घर घर पहुंची पोर्नोग्राफी" !
पत्रिका की पंक्तियों को दोहराया ,
और प्रश्न उठाया बोले -ये पोर्नोग्राफी क्या चीज है ?
मैंने कहा पता नहीं पढ़ कर बताऊंगा ,
वो बोले -पैसे लुटाते हो,
पत्रिका अगर पढ़ नहीं  सकते ,
तो फिर क्यों मंगाते हो !!

मैं अवाक् ,निःशब्द निरुत्तर ही रहा! जी में आया कह दू  साहित्य  की नाजायज औलाद है पोर्नोग्राफी पर संकोच वश कह नहीं सका! दो पीढियों के बीच खड़ा मैं सोच रहा  हूँ पिता पुत्र लाख मित्रवत हो कुछ विषय शेयर नहीं किये जा सकते !परिवार में पढ़ी जाने वाली पत्रिकाओं में ऐसी सामग्रियों को कवर पर छापने का क्या तुक है?मुझे लगता है पत्रिकाओ को भी A  और U का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर देना चाहिए ताकि  U  श्रेणी की पत्रिका  A श्रेणी में सेंध न मार सके !

पोर्नोग्राफी के लिए यूं तो मैंने घर के सारे खिड़की दरवाजे बंद कर रखे थे पर कुछ सुराख़ रह गए जिन्हें मैं बंद नहीं कर पाया ! सोचता हूँ कौन बंद कर पायेगा , जब आज हर हाथ में मोबाइल है और मोबाइल में इन्टरनेट ...                    .....,,,.....                                                                                                                                             ब्रजेश   

Wednesday, March 28, 2012

चंद लाइने जो दिल्ली के वरिष्ठ  ips अधिकारी तजेंद्र सिंह लूथरा  के प्रथम काव्य संग्रह --अस्सी घाट का बांसूरी वाला -- से ली गयी हैं ...स्रोत ...इंडिया टुडे 

ढूँढोगे तो सन्दर्भ भी मिल जायेंगे मेरी कविताओं के 
निकालोगे अर्थ 
तो निकल आएंगे मेरे प्रतीकों के
कोशिश करोगे तो पहचान ही लोगे मेरे बिम्बों को  
पर क्या फायदा 
मुझे कहने दो ये बाते 
लुके छिपे ढंग से !
                 

Sunday, March 18, 2012

.परीक्षा फल

परीक्षा  फल  के भय से आदमी को जीवन भर मुक्ति नहीं मिलती ,ऐसा मसूस होता है  जब अपने बच्चो का परीक्षा  फल  देखने उनके स्कूल जाता हूँ !वही भय और बेचैनी  महसूस  करता हूँ !कल ये भय अपने लिए था आज बच्चो के लिए है और इस प्रकार लगता है की उम्र भर रहेगा !..........आज जाना है स्कूल .....

BRAVO - SACHIN

कल की 52 रनों की पारी ने सचिन के आलोचकों को एक बार फिर से जवाब दे दिया है !और आज उनके खिलाफ ज्यादा कुछ दिख भी नहीं रहा है !पता नहीं कुछ बुध्धिजीवी ऐसी प्रतिक्रिया देने में क्यों लगे है मानो सचिन ने 100 शतक बंगलादेश के खिलाफ ही लगाये है !........मैं हैरान रह जाता हूँ कि....कैसे 22 सालो तक देश का परचम बुलंद कर भी कोई  देश भक्त नहीं बन पाता, कोई घर में टीवी पर मैच देख कर ही देश भक्त बन जाता है ! क्रिकेट कि ऐसी विलक्षण योग्यता को मेरा सलाम ! 

Friday, March 16, 2012

घटिया पत्रकारिता

कल स्टार न्यूज़ पर घटिया पत्रकारिता देखने को मिली ,जब उसके दो होनहार पत्रकार इतने उत्तेजित दिखे मानो वो विनोद काम्बली और सबा करीम के मुह में उंगली डालकर बस एक ही बात कहलवाना चाह रहे थे... कि सचिन कि धीमी बल्लेबाजी ही भारत कि हार का कारण बनी !कोई उन गधो से ये पूछे कि क्या दोनों छोर से  सचिन ही बैटिंग  रहे थे! २९० का स्कोर क्या कम था जो हमारे गेंदबाज बचा नहीं सके !ऐसा लगा मानो  ये घटिया पत्रकार एक महानआदमी की महान उपलब्धि पर कीचड़ उछाल कर अपनी बची खुची  होली मना रहे थे !